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Dard Bhari Shayari

और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा,
मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा,
यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार,
प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा..

जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम
मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम
सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा
बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है!
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है!
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर!
जैसे कोई कांच का खिलौना चूरचूर होता है!

 

कभी कभी मेरी आँखे यूँ ही रो पडती है,
मै इनको कैसे समझाऊँ,
कि कोई शक्स सिर्फ चाहने से ही अपना नही हो जाता,
किस्मत की लकीरें भी चाहिए..

कब उनकी आँखों से इज़हार होगा
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा
गुज़र रही हे रात उनकी याद में
कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा..

ज़रा सी बात पे ना छोड़ना किसी का दामन
उम्रें बीत जाती हैं दिल का रिश्ता बनाने में ….

मुझसे ‘नफरत’ तभी करना
जब आप मेरे बारे मे ‘सबकुछ’ जानते हो
तब नहीं जब किसी से ‘कुछ’ सुना हो ।

मैं कई अपनों से वाक़िफ़ हूँ
जो पत्थर के बने हैं !!!
लाजमी तो नही है कि तुझे आँखों से ही देखूँ..
तेरी याद का आना भी तेरे दीदार से कम नही..

काश तू मुझसे बस इतनी सी मोहब्बत निभा दे
जब मै रुठु तो तू मुझे मना ले !

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अजीब सबूत माँगा उसने मेरी मोहब्बत का,
कि मुझे भूल जाओ तो मानूँ मोहब्बत है!

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कुछ नहीं है आज मेरे शब्दों के गुलदस्ते में,
कभी कभी मेरी खामोशियाँ भी पढ लिया करो…!!

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ये तो इश्क़ का कोई लोकतंत्र नहीं होता,
वरना रिश्वत देके तुझे अपना बना लेता!!

हम क्या हे वो सिर्फ हम ही जानते हे,
लोग तो सिर्फ हमारे बारे में अंदाज़ा लगा सकते हे !!

जरा ठहर ऐ जिंदगी तुझे भी सुलझा दुंगा ,
पहले उसे तो मना लूं जिसकी वजह से तू उलझी है..

हजारो ने दिल हारे है तेरी सुरत देखकर,
कौन कहता है तस्वीर जूआँ नही खेलती.

न जख्म भरे,न शराब सहारा हुई,
न वो वापस लौटी न मोहब्बत दोबारा हुई..

बाज़ार में बिकी हुई चीजों की माँग है
हम इस लिये ख़ुद अपने ख़रीदार हो गये..

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